हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , हुज्जतुल इस्लाम वल-मुस्लिमीन सैयद अहमद रज़ा शाहरुख़ी ने इस सप्ताह खुर्रमाबाद के मुसल्ला-ए-अल-ग़दीर में जुमआ की नमाज़ के ख़ुत्बे में कहा कि ईरान की जनता देश से प्रेम करती है और मातृभूमि की रक्षा के लिए अपनी जान तक कुर्बान करने को तैयार है। उन्होंने कहा कि जनता को आजीविका के मामले में कठिनाइयों और महँगाई का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद वह देश की रक्षा और सशस्त्र बलों के समर्थन से पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि समाज में जमाखोरी और महँगाई जैसी समस्याएँ मौजूद हैं, फिर भी जनता अमेरिका और ज़ायोनी दुश्मनों का मुकाबला करने के लिए तैयार है।
उन्होंने बातचीत के मुद्दे पर कहा कि जब तक ईरान की सात शर्तों को व्यावहारिक रूप से स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक वार्ता की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरान का सामना उस ताकत से है जिसे वह ‘बड़ा शैतान’ कहता है। उनके अनुसार, पहले भी कई बार बातचीत हुई, लेकिन वार्ता की मेज़ से ही हमला कर दिया गया। इसलिए आज इस विरोधी के प्रति सतर्क और जागरूक रहना आवश्यक है।
इमामे जुमआ ने कहा कि देश के भीतर कुछ लोग राजनीतिक सद्भावना को आधार बनाकर आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन इससे कोई परिणाम नहीं निकलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि दुश्मन ईरान को नष्ट करने और उसके विभाजन की बात करता है। उन्होंने कूटनीतिक संस्थानों से अपील की कि वे ऐसी धमकियों का सख़्त जवाब दें। उनके अनुसार, कूटनीति में कमज़ोर रुख़ अपनाने से दुश्मन की माँगें और बढ़ जाती हैं।
हुज्जतुल इस्लाम शाहरुख़ी ने कहा कि जब दुश्मन ने ईरान के नेता की हत्या की, तब उसे ऐसा जवाब दिया जाना चाहिए था जिससे वह दोबारा इस तरह की हिम्मत न कर सके। उन्होंने कहा कि इस दुश्मन के सामने डटकर खड़ा होना चाहिए, क्योंकि कमज़ोरी दिखाने का परिणाम बाद में पछतावे के रूप में सामने आता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि देश का कूटनीतिक तंत्र ऐसा प्रभावी रुख़ अपनाएगा जिससे विरोधी दबाव महसूस करें।
उन्होंने लोरिस्तान प्रांत में इस्लामी गणराज्य की सेवाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता सरकार की विकास परियोजनाओं की सराहना करती है। युद्ध के दिनों में भी बाँध निर्माण, सड़क निर्माण, रेलवे और अन्य विकास कार्य जारी हैं, जिससे लोगों में संतोष पैदा होता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि खुर्रमाबाद के निवासी मुख्य और संपर्क सड़कों की ऊबड़-खाबड़ स्थिति तथा गलियों की अव्यवस्था से परेशान हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि सड़कों की स्थिति में सुधार के लिए लोगों को आखिर कितने वर्षों तक इंतज़ार करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जब भी जनता से मुलाकात होती है, सड़कों की समस्या प्रमुख शिकायतों में शामिल रहती है। इसलिए सरकारी निरीक्षण संगठन को इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए और समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (स.ल.) की शहादत की बरसी और अय्याम-ए-फ़ातिमिया का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उनकी शहादत ने सत्य के परचम को क़यामत तक बुलंद कर दिया। उन्होंने कहा कि घर की ज़िम्मेदारियों को निभाने वाली माँ, आदर्श पत्नी, शिक्षिका, आरिफ़ा और सामाजिक संघर्ष करने वाली महान हस्ती के रूप में हज़रत फ़ातिमा ज़हेरा (स.ल.) का जीवन हम सभी के लिए मार्गदर्शन है। उन्होंने लोगों से अपील की कि इन दिनों का लाभ उठाकर फ़ातिमी शिक्षाओं और उनके जीवन के आदर्शों को समझें।
इमाम ए जुमा ने इमाम ख़ुमैनी के पुत्र शहीद मुस्तफ़ा ख़ुमैनी की शहादत की बरसी का उल्लेख करते हुए कहा कि वह एक योग्य, पवित्र व्यक्तित्व और मुज्तहिद थे। उन्होंने कई वर्षों तक इमाम ख़ुमैनी के साथ रहकर उन गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिनसे इस्लामी क्रांति की सफलता का मार्ग प्रशस्त हुआ।
कैपिटुलेशन कानून की मंज़ूरी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह पहलवी शासन के माथे पर लगा ऐसा कलंक था, जो कभी मिट नहीं सकता। उन्होंने कहा कि पहलवी शासन के दौरान इस तरह के कई कदम उठाए गए, लेकिन इमाम ख़ुमैनी ने धर्मगुरुओं और विश्वविद्यालयों से जुड़े लोगों के साथ मिलकर इस कानून का विरोध किया।
देश के खिलाड़ियों की उपलब्धियों पर उन्होंने कहा कि दुश्मन चाहता था कि ईरान का राष्ट्रीय ध्वज बुलंद न हो, लेकिन देश के युवा खिलाड़ियों ने अमेरिका और अन्य प्रतिद्वंद्वियों को हराकर ईरान का नाम रोशन किया और राष्ट्रीय ध्वज को गौरवान्वित किया।
अपने भाषण के अंत में उन्होंने फ्रांस में जारी विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वहाँ के लोग शिक्षा, आजीविका और अन्य समस्याओं को लेकर विरोध कर रहे हैं और देश गंभीर कठिनाइयों का सामना कर रहा है।
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